August 14, 2022, 3:29 pm
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हाई ब्लड प्रेशर में करें इन दवाई का उपयोग, ब्रेन हेमरेज का है रामबाण

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धमनियों की दीवार कमजोर होने से बनने वाले ऐन्यरिजम (बाहरी उभार जैसी संरचना) के फटने से स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए उससे बचाव का उपाय करना जरूरी होता है।

इस दिशा में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक नए शोध में पाया है कि ब्लड प्रेशर कम करने की दवा (आरएएएस इन्हिबिटर) ऐन्यरिजम के फटने के जोखिम को 18 प्रतिशत तक कम कर सकता है। यह शोध अलग-अलग जगहों पर रहने वाले 3000 से ज्यादा ऐसे लोगों पर किया गया, जो हाई ब्लड प्रेशर तथा ब्रेन ऐन्यरिजम से पीडि़त थे।

बाधित हो जाती है आक्सीजन की आपूर्ति

इस शोध का निष्कर्ष हाइपरटेंशन जर्नल में प्रकाशित किया है। मस्तिष्क की धमनी में होने वाले ऐन्यरिजम को इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम कहते हैं। यदि कोई इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम हो जाए तो मस्तिष्क में ब्लड फैल जाता है और फिर उस स्थान पर आक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इससे हेमरैजिक स्ट्रोक, कोमा में जाने की स्थिति बनती है और मौत भी हो सकती है।

मौत का आंकड़ा ज्यादा

दुनियाभर में होने वाले कुल स्ट्रोक के मामलों में ऐन्यरिजम स्ट्रोक तो होते हैं 3-5 प्रतिशत ही, लेकिन अन्य स्ट्रोक की तुलना में इसमें मौत का आंकड़ा ज्यादा होता है। इतना ही नहीं, यदि उससे उबर भी गए तो दिव्यांगता का भी एक बड़ा कारण होता है।

ऐसे बढ़ता है जोखिम

शोधकर्ताओं के मुताबिक, शरीर का रेनि-एंजियोटेंसिन- अल्डोस्टेरोन सिस्टम (आरएएएस) के हार्मोन ब्लड प्रेशर रेगुलेशन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आरएएएस के अनियंत्रित होने से हाई ब्लड प्रेशर होता है। पाया गया है कि आरएएएस के दो घटक इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम के विकास में शामिल होते हैं। पहले के अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि आरएएएस के अनियंत्रित होने से ऐन्यरिजम रप्चर (धमनियों के बाहरी भाग में बैलून जैसी आकृति का फटना) का जोखिम बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर से भी पीडि़त होते हैं रोगी

आरएएएस इन्हिबिटर दवाएं का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में किया जाता है, जिससे आएएएस का प्रभाव ब्लाक हो जाता है। अध्ययन के वरिष्ठ शोधकर्ता चंघाई हास्पिटल में न्यूरोसर्जरी के विशेषज्ञ किंघई हुआंग ने बताया कि इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम के आधे रोगी हाई ब्लड प्रेशर से भी पीडि़त होते हैं, इससे वस्कुलर इन्फ्लैमशन होता है तथा ऐन्यरिजम रप्चर का जोखिम बढ़ता है।

एक तिहाई रोगियों की हो जाती है मौत

ऐन्यरिजम रप्चर के एक तिहाई रोगियों की तो मौत हो जाती है और शेष जीवित बचे लोग जीवनभर के लिए अपनी दैनिक कामकाज के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जोखिम वाले कारकों पर अंकुश हो जिससे कि ऐन्यरिजम रप्चर की रोकथाम हो सके।

20 मेडिकल सेंटरों से जुटाए आंकड़े

इस अध्ययन में चीन के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 20 मेडिकल सेंटरों से 2016-2021 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें ऐन्यरिजम रप्चर के पहले और बाद के आंकड़े जुटाए गए ताकि आरएएएस इन्हिबिटर के इस्तेमाल तथा ब्लड प्रेशर की अन्य दवाओं (जिनमें बीटा ब्लाकर्स तथा डाययूरेटिक्स भी शामिल हैं) का ऐन्यरिजम रप्चर से संबंधों का आकलन किया जा सके।

इन्‍हें किया गया शोध में शामिल

अध्ययन में तीन हजार से ज्यादा ऐसे वयस्कों को शामिल किया गया, जो हाई ब्लड प्रेशर तथा इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम से पीडि़त थे। अध्ययन में शामिल इन प्रतिभागियों में एक-तिहाई पुरुष तथा शेष दो-तिहाई महिलाएं थीं। इनकी औसत उम्र 61 वर्ष थी। प्रतिभागियों को ब्लड प्रेशर की स्थिति के हिसाब से कंट्रोल ग्रुप (एंटीहाइपरटेंसिव के इस्तेमाल से सामान्य ब्लड प्रेशर) या अनकंट्रोल ग्रुप (एंटीहाइपरटेंसिव दवाओं के इस्तेमाल के बावजूद ब्लड प्रेशर की माप 140/90 या इससे अधिक) में बांटा गया।

ऐसे किया अध्‍ययन

इनके ब्लड प्रेशर की माप ऐन्यरिजम के कारण अस्पताल में भर्ती होने से तीन महीने पहले भी रिकार्ड किया गया। विश्लेषण में पाया गया कि आरएएएस इन्हिबिटर लेने वाले 32 प्रतिशत प्रतिभागी इंट्राक्रेनियल ऐन्यरिजम रप्चर के शिकार हुए, जबकि नान-इन्हिबिटर आरएएएस लेने वाले प्रतिभागियों में इनकी संख्या 67 प्रतिशत थी।

कम किया जा सकता है जोखिम

हुआंग ने बताया कि हम इस बात से हैरान थे कि जिनका हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित था और आरएएएस इन्हिबिटर लिया, उनमें नान-आरएएएस इन्हिबिटर लेने वालों की तुलना में ऐन्यरिजम रप्चर का जोखिम उल्लेखनीय रूप से कम था। इस तरह हमारा अध्ययन इस बात का संकेत देता है कि ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने के लिए यदि उचित एंटीहाइपरटेंसिव दवाओं का इस्तेमाल किया जाए तो ऐन्यरिजम रप्चर का जोखिम कम किया जा सकता है।

18 प्रतिशत तक लाई जा सकती है कमी

उन्होंने बताया कि इन आंकड़ों के आधार पर हमारा अनुमान है कि यदि हाई ब्लड प्रेशर तथा क्रेनियल ऐन्यरिजम के सभी रोगियों को आरएएएस इन्हिबिटर दिया जाए तो ऐन्यरिजम रप्चर के मामलों में करीब 18 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

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