December 2, 2022, 5:29 am
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सरकार जल्द ही 32% आरक्षण लागू नही करती है तो खुद की सरकार बनाने के लिए तैयार है आदिवासी समाज – सतीश नेताम

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कसडोल – /छत्तीसगढ़ प्रदेश में लागू होते कुल आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए उच्च न्यायालय के आए एक फैसले से प्रदेश में तत्कालीन समय में लागू 32 प्रतिशत का आरक्षण पर भी काफी असर पड़ा है।इस फैसले की वजह से अब इस प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए लागू रहे 32 प्रतिशत आरक्षण में सीधे तौर से 12 प्रतिशत का आरक्षण कम हो कर केवल 20 प्रतिशत आरक्षण ही शेष रह गया।आरक्षण में इस तरह हुई कटौती पूर्व सरकार द्वारा तत्कालीक रूप से न्यायालय में कोई ठोस दलील के साथ पैरवी नही की जा सकी थी।हालांकि सरकार द्वारा 1 व 2 दिसंबर के बुलाए जा रहे विशेष सत्र में आरक्षण पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके लिए राज्यपाल ने भी अनुमति दी है।

32 प्रतिशत आरक्षण में उच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार देते हुए 12 प्रतिशत की कटौती कर 20 प्रतिशत किए जाने की बहाली को लेकर सर्व आदिवासी समाज प्रदेश भर में आज 15 नवंबर को आर्थिक नाकेबंदी का आयोजन कर सड़कों को घेर लिया है इससे चक्का जाम की स्थिति निर्मित हो गई है। इससे पहले भी सरकार को ध्यानाकर्षण कराया गया था किंतु निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण धरना प्रदर्शन जैसी स्थिति बन गई है। 
       

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में हाईकोर्ट के फैसले से होकर 20% हो गया इस फैसले में प्रदेश में शैक्षणिक (मेडिकल, इंजीनिरिंग, लॉ, उच्च शिक्षा) एवं नए भर्तियों में आदिवासियों को बहुत नुकसान हो जाएगा। राज्य बनने के साथ ही 2001 से आदिवासिय 32% आरक्षण मिलना था परंतु नई मिला । केंद्र के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के द्वारा जारी 5 जुलाई 2005 के निर्देश जनसंख्या अनुरूप आदिवासी 32%, एससी12%,और ओबीसी के लिए 6% और पदों के लिए जारी किया गया था। छत्तीसगढ़ शासन को बारंबार निवेदन आवेदन और आंदोलनों के बाद आरक्षण अध्यादेश 2012 के अनुसार आदिवासियों को 32% एस सी 12% एवं ओबीसी को 14% दिया गया अध्यादेश को हाई कोर्ट में अपील किया गया छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सही तथ्य नहीं रखने से हाईकोर्ट ने आरक्षण अध्यादेश 2012 को अमान्य कर दिया। अभी तक छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कोई ठोस पहल आदिवासियों के लिए नहीं किया गया इसके विपरीत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सभी भर्तियों एवं शैक्षणिक संस्थाओं में आदिवासियों के लिए दुर्भावनापूर्ण आदेश जारी करने लगा। छतीमगड में 60% क्षेत्रफल पंचिवी अनुसूचित के तहत अधिसूचित है, जहां प्रशासन और नियंत्रण अलग होगा। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जनसंख्या 70% से लेकर 90% मे आदिवासी ज्यादा है और बहुत ग्रामो में 100% आदिवासियों की जनसंख्या है। अनुसूचित क्षेत्रों में ही पूरी संपदा (वन, खनिज और बौद्धिक) है। छतीसगढ़ में आदिवासी समाज शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से पिछड़ा हुआ है। संवैधानिक प्रावधान के बाद भी आदिवासी बाहुल्य पिछड़े प्रदेश में आदिवासियों को आरक्षण से वंचित करना प्रशासन की विफलता और यंत्र है। छत्तीसगढ़ में आरक्षण के लिए आवेदन के साथ लोकतान्त्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए समाज बाध्य होगा। साथ ही आदिवासी समाज कि आवश्यक मांगे”

प्रदेश में पेशा कानून लागू कड़ाई से लागू करे सरकार
“बस्तर एवं सरगुजा में तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग की भर्ती 100 प्रतिशत स्थानीय किया जाये। केंद्र के द्वारा वन अधिकार संरक्षण अधिनियम 2022 को लागू न किया जाये।”
“हसदेव आरण्य क्षेत्र में आदिवासी एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु कोल खनन बंद किया जाये । प्रदेश के आदिवासी समाज के संरक्षक के रूप में आपसेआग्रह है छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के लिए अतिशीघ्र 32% आरक्षण लागू किया जाए ताकि आदिवासियों का शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक विकास हो सके।

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