May 20, 2022, 12:24 am
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कोरोना काल में गिलोय का अधिक इस्तेमाल करने से लिवर हो रहा खराब, पेट में बन रहे है खून के थक्के

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जीएसवीएम मेडिकल कालेज के सभागार में आइएमए सीजीपी के रिफ्रेशर कोर्स मे हैदराबाद से आए डा. संदीप लखटकिया ने कहा है कि कोरोना काल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए डाक्टरों की सलाह के बिना लोगों ने खूब गिलोय के कैप्सूल खाए।

इससे पेट में खून के थक्के बन गए हैं और लिवर फंक्शन खराब हो गया है। शोध में इसकी पुष्टि हुई है।

डा. संदीप ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से पेट में छिपे रोगों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। पेट और आंतों के ट्यूमर, पैनक्रियाइटिस व पथरी का भी पता लगा सकते हैं। उसी समय उसे हटाया भी जा सकता है। बड़ी आंत 28 व छोटी आंत 15 फीट लंबी होती है। इसकी गड़बड़ी भी एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से पकड़ सकते हैं। यह ट्यूमर और गैस्ट्रो जिजनास्टमी में भी कारगर है। पित्त की नली में पथरी चिपकने पर निकालना संभव है। इस दौरान, कार्यक्रम निदेशक डा. गौरव चावला, चेयरपर्सन डा. आलोक गुप्ता, डा. अरुण अंडूरी, डा. विकास सेंगर मौजूद रहे।

इंटरवेंशनल रेडियोलाजी में जटिलताएं कम : लखनऊ से आए डा. राजेन्द्र वी फड़के ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलाजी ने मरीजों में रोग की जटिलाओं को काफी हद तक कम किया है। जनरल सर्जरी की तुलना में अल्ट्रासाउंड गाइडेड, सीआर्म गाइडेड, सीटी व एमआरआइ गाइडेड इंटरवेंशन के जरिए जोखिम और दर्द होता है। उन्होंने कहा कि अब इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट एंजियोप्लास्टी, स्टंटिंग, जलोदर टैप, पित्त फ्लूड निकालना, बर्सल इंजेक्शन लगाना भी संभव है। इमेज गाइडेड लिवर बायोप्सी भी आसानी से की जा सकती है। इस दौरान, कार्यक्रम निदेशक डा. विकास गुप्ता, चेयरपर्सन डा. अशोक वर्मा, डा. अजय तिवारी व डा. देवज्योति देवराय रहे।

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