July 3, 2022, 11:49 pm
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छत्तीसगढ़ के इस जिले में होती है दानव की पूजा, नारियल, फूल, अगरबत्ती चढ़ाकर मांगते हैं मन्नत

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सूरजपुर जिले में रेण नदी के किनारे एक गांव बसा है. आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जहां मन्नत मांगने पर पूरी हो जाती है. छत्तीसगढ़ ही नहीं झारखंड, एमपी और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते है.

Chhattisgarh News: सूरजपुर(Surajpur) जिले का एक गांव है. जहां जाकर लोग नारियल, फूल, अगरबत्ती चढ़ाकर पूजा अर्चना कर मन्नत मांगते है. लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसी जगह है जहां लोग देवी देवता की नहीं दानव की पूजा करते है. सुनने में अजीब लग सकता है. लेकिन ये सच है. प्रदेश के सूरजपुर जिले में रेण नदी(Ren River) के किनारे एक गांव बसा है. यहां आस्था का ऐसा केंद्र है. जहां मन्नत मांगने पर वह पूरी हो जाती है. इस जगह पर छत्तीसगढ़ ही नहीं झारखंड(Jharkhand), एमपी(madhya Pradesh) और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते है और मन्नत मांगते है.

बैगा के पूजा पाठ से प्रसन्न हुआ बकासुर दानव

सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक अन्तर्गत खोपा नामक गांव है, जो रेण नदी के किनारे बसा हुआ है. इस गांव में एक धाम है, जहां देवी देवता की नहीं दानव की पूजा होती है. इसके पीछे की कहानी भी काफी रोचक है. मान्यता है कि खोपा गांव के बगल से गुज़रे रेण नदी में पुराने समय में बंकासुर नाम का दानव रहता था. बंकासुर गांव के एक बैगा के पूजा पाठ से प्रसन्न हो गया और अपने साथ ले जाने के लिए कहा. इस पर बैगा बंकासुर दानव को अपने घर में ले जाना चाहता था लेकिन बकासुर ने ऐसा करने से मना किया और बाहर में ही रहने की बात कही. तब से खोपा गांव में दानव बंकासुर की पूजा शुरू हो गई. खोपा गांव को अब खोपा धाम के नाम से जाना जाता है, और खास बात ये है कि यहां कोई पंडित या पुजारी पूजा नहीं कराता, बल्कि बैगा पूजा करवाते है.

खोपा धाम में मांगी गई हर मुराद होती है पूरी

ऐसी मान्यता है कि खोपा धाम में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. शायद यही वजह है कि इस धाम में पूजा करने के लिए हर दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है और पूजा अर्चना करते है. कहा जाता है कि रविवार के दिन यहां हजार की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है. इतनी ज्यादा संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने के बावजूद इस जगह पर मंदिर का निर्माण नहीं कराया गया है, लोग इसके पीछे की वजह बताते है कि बंकासुर दानव किसी मंदिर या चारदीवारी में बंद नहीं रहना चाहते थे. खोपा धाम में हर कोई कुछ मन्नत मांगने के लिए पहुंचता है. जहां उपस्थित बैगा विधि विधान से पूजा करवाता है. मन्नत पूरी होने के साथ मुर्गा, बकरा के साथ शराब चढ़ाया जाता है. यहां चढ़ाया हुआ प्रसाद घर नहीं लाया जाता. बताया गया कि पूर्व में यहां महिलाओं के पूजा करने पर पाबंदी थी लेकिन अब महिलाएं भी पूजा करने आती है. पिछले कई वर्षो से खोपा धाम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां हर समय श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. इसकी वजह ये है की यहां से कोई खाली हाथ वापस नहीं जाता.

कैसे पहुंचे –

खोपा धाम जिला मुख्यालय सूरजपुर से बिश्रामपुर-दतिमा-बतरा मार्ग से 25 किलोमीटर दूर है. जबकि सूरजपुर-बसदेई मार्ग से 13 किलोमीटर दूर है. यहां बाइक, कार, बस के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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