September 29, 2022, 4:31 pm
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CG: प्रदेश आदिवासी सेना के नेतृत्व मे हुआ शहीद वीरनारायण सिंह स्वाभिमान पदयात्रा

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जन्मभूमि सोनाखान से मिट्टी लेकर 8 दिन की पदयात्रा में पहुंचा शहादत स्थल जय स्तम्भ चौक रायपुर, विलयकरण हुआ जन्म भूमि और शहादत भूमि की मिट्टी

मुख्यमंत्री ने आदम कद की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा, अब तक की शहर मे होगी सबसे बड़ी प्रतिमा

सतीश नेताम/बलौदाबाजार-प्रदेश आदिवासी सेना की अगुवाई में अपने महापुरुष पुरखा छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद 1857 मे अंग्रेजो के खिलाफ बिगुल फूकने वाले शहीद वीर नारायण सिंह स्वाभिमान पदयात्रा जिसका उद्देश्य शहादत स्थल जयस्तम्भ चौक रायपुर में आदम कद प्रतिमा की मांग करने के लिए 2 दिसंबर (इस दिन वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था) इस दिन से वीरभूमि, जन्मभूमि, कर्मभूमि सोनाखान से मिट्टी लेकर पद यात्रा करते 8 दिनों में सफर तय करते हुए शहादत स्थल जय स्तंभ चौक रायपुर (जहां पर फांसी दिया गया था और सप्ताह भर लाश को लटकाए रहा और तोप से उड़ा दिया जो शायद किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को इस प्रकार की क्रूरता दिखाया होगा) इस शहादत स्थल पर पदयात्री पहुंचें और पूजा पद्धति के बाद श्रद्धांजलि दिया गया।

सैकड़ों की तादात में जब राजधानी रायपुर में पदयात्री प्रवेश किया तो जगह जगह पवित्र मिट्टी को नमन करते हुए पद यात्रियों को सम्मान किया जा रहा था वही शासनिक प्रशासनिक गलियारों मे हल चल तेज हो गया था समाज के लोगों का राजधानी कुच प्रारंभ हो गया था 10 दिसंबर को सैकड़ों से लाखों में तब्दील हो गया। जानकारो के मुताबिक जब पद यात्री रायपुर पहुंचे तो सोनाखान की धरती से मुख्यमंत्री शहीद वीर नारायण सिंह जी का जयस्तम्भ चौक में प्रतिमा लगाने की घोषणा करने की संभावनाएं जताया गया था। और पदयात्री 10 दिसंबर को जयस्तम्भ चौक पहुंचने के पहले ही मुख्यमंत्री का घोषणा प्राप्त हो गया। जयस्तम्भ चौक मे श्रद्धांजलि देने के पश्चात आदिवासी समाज एक दूसरे को बधाई देने लगे।

आदिवासी समाज में मातृशक्ति का होता है अहम योगदान

नारी शक्ति दृढ़ संकल्प ठान ले तो बड़ा से बड़ा कार्य सरलता पूर्वक हो जाता है आदिवासी समाज मातृशक्ति प्रधान समाज है आज मातृशक्ति के कारण ही आदिवासी संस्कृति जीवित है जो जीता जागता उदाहरण आज भी समाज में देखने को मिलता है इसी प्रकार शहीद वीर नारायण सिंह स्वाभिमान पदयात्रा में मात्र शक्तियों का अहम योगदान देखने को मिला जो कदम से कदम मिलाकर करीब 150 किमी. की पदयात्रा किया। यशोदा मरकाम, गायत्री, प्रमिला, दुकलहिन, जानी, मालती मंडावी, जयन्ती, गौरी बाई, फगनीबाई, बिस्मत, रेवती, बुधियारीन, बाहरीन कंवर, सोनारिन बाई सहित अन्य सैंकड़ों की संख्या में मातृशक्तियों ने पदयात्रा में योगदान दिया। जिसका अगुवाई आदिवासी सेना प्रदेशध्यक्ष दिनु नेताम, उपाध्यक्ष नेतराम ध्रुव, महासचिव संतराम ध्रुव, जिलाध्यक्ष सतीश नेताम, काशी ध्रुव, विजेन्द्र मरकाम, समोखन ध्रुव, राजा मंडावी, रवि ध्रुव, झालाराम ध्रुव, भोजराम, तोरण, विकास मंडावी सहित समाज के लोग पदयात्रा मे शामिल थे।

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